
Saraswati Puja 2026 : तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विद्या की देवी का आशीर्वाद |
हर इंसान की ज़िंदगी में एक समय ऐसा आता है जब उसे ज्ञान, बुद्धि और सही मार्गदर्शन की चाह होती है। खासकर स्टूडेंट लाइफ में, जब किताबें बोझ लगने लगती हैं और मन पढ़ाई से भटकता है, तो सिर्फ़ एक ही नाम याद आता है: देवी सरस्वती।
Saraswati Puja 2026 सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि का उत्सव है। यह पूजा हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता सिर्फ़ कड़ी मेहनत से नहीं, बल्कि सही सोच और बुद्धि से भी मिलती है।
यह दिन देवी सरस्वती का आशीर्वाद पाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है, खासकर स्टूडेंट्स, टीचर्स, कलाकारों और विद्वानों के लिए।
Saraswati Puja 2026 : तारीख और शुभ मुहूर्त
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व का नाम | सरस्वती पूजा 2026 |
| तिथि | 23 जनवरी 2026 |
| वार | शुक्रवार |
| विशेष योग | बसंत पंचमी |
सरस्वती पूजा बसंत पंचमी को मनाई जाती है।
Saraswati Puja 2026 : शुभ मुहूर्त और शुभ समय
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| पूजा मुहूर्त | प्रातः 07:15 से 12:30 बजे तक |
| पुण्यकाल | सूर्योदय से सूर्यास्त तक |
| विशेष समय | मध्याह्न काल श्रेष्ठ |
इस समय की गई पूजा से ज्ञान, बुद्धि और याददाश्त बढ़ती है।

सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सरस्वती भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं। उन्हें ज्ञान, वाणी, बुद्धि और संगीत की देवी माना जाता है।
सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि:
- यह दिन शिक्षा की शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
- बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान (विद्यारंभ) कराया जाता है।
- इस दिन शिक्षा से जुड़े सभी उपकरणों की पूजा की जाती है।
माना जाता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से देवी सरस्वती की पूजा करता है, उसके जीवन से अज्ञानता का अंधेरा दूर हो जाता है।
सरस्वती पूजा का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय जब चारों ओर सन्नाटा और अज्ञानता थी, तब भगवान ब्रह्मा ने देवी सरस्वती की रचना की।
देवी सरस्वती के प्रकट होने से:
- दुनिया में वाणी आई।
- संगीत और कला का जन्म हुआ।
- ज्ञान और बुद्धि का प्रसार हुआ।
इसलिए, सरस्वती पूजा को ज्ञान के प्रकाश का त्योहार कहा जाता है।
सरस्वती पूजा विधि
सरस्वती पूजा की सरल विधि
- सुबह स्नान करके साफ पीले या सफेद कपड़े पहनें।
- पूजा की जगह को साफ करें।
- देवी सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- देवी को पीले फूल, सफेद फूल और साबुत चावल के दाने चढ़ाएं।
- पूजा में किताबें, पेन और वाद्य यंत्र रखें।
- “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
- आखिर में, आरती करें और प्रसाद बांटें।
इस दिन पेन और किताबों का इस्तेमाल न करना शुभ माना जाता है।

सरस्वती पूजा का विशेष महत्व
सरस्वती पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि शैक्षिक और सांस्कृतिक भी है।
यह पूजा खासकर इनके लिए महत्वपूर्ण है:
- छात्र
- शिक्षक
- संगीतकार और कलाकार
- लेखक और कवि
ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी सरस्वती का आशीर्वाद मिलने से बुद्धि तेज होती है, वाणी मधुर होती है, और मन तेज होता है।
Saraswati Puja 2026 के दौरान क्या चढ़ाना चाहिए?
| वस्तु | महत्व |
|---|---|
| पुस्तकें | ज्ञान का प्रतीक |
| कलम | लेखन शक्ति |
| वाद्य यंत्र | संगीत और कला |
| पीले फूल | शुभता और बसंत |
| खीर / हलवा | प्रसाद |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Saraswati Puja 2026 कब है?
Ans :- 23 जनवरी, 2026।
Q2. सरस्वती पूजा किस दिन मनाई जाती है?
Ans :- बसंत पंचमी पर।
Q3. क्या सरस्वती पूजा के दिन पढ़ना मना है?
Ans :- पूजा के दिन किताबें पढ़ने के बजाय उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है।
Q4. सरस्वती पूजा के लिए कौन सा रंग शुभ माना जाता है?
Ans :- पीला और सफेद।
Q5. क्या सरस्वती पूजा घर पर की जा सकती है?
Ans :- हाँ, पूजा पूरी श्रद्धा के साथ घर पर की जा सकती है।
निष्कर्ष
Saraswati Puja 2026 सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि जीवन में ज्ञान और बुद्धि को अपनाने का एक संदेश है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि सच्ची सफलता धन से नहीं, बल्कि ज्ञान और मूल्यों से मिलती है।
अगर हम देवी सरस्वती की सच्चे मन से पूजा करते हैं, तो यह निश्चित रूप से हमारे जीवन में सफलता, शांति और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग खोलता है।
अस्वीकरण
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और सामान्य कैलेंडर गणनाओं पर आधारित है। तारीखें और शुभ समय क्षेत्रीय कैलेंडर के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। कोई भी पूजा या धार्मिक समारोह करने से पहले हमेशा अपने स्थानीय कैलेंडर या विद्वान से सलाह लें।
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