
Makar Sankranti 2026 : सूर्य देव की कृपा पाने का महापर्व |
Makar Sankranti 2026 हमारे जीवन में कुछ त्यौहार सिर्फ़ उत्सव नहीं होते, बल्कि अपने साथ नई ऊर्जा, नई दिशा और नई उम्मीद लाते हैं। मकर संक्रांति उन्हीं पवित्र त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार हमें याद दिलाता है कि जिस तरह सूरज अपनी दिशा बदलकर अंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ता है, उसी तरह हमें भी नकारात्मकता को पीछे छोड़कर अपने जीवन में सकारात्मकता को अपनाना चाहिए।
Makar Sankranti 2026 न केवल खगोलीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक महत्व भी बहुत ज़्यादा है।
Makar Sankranti 2026 : तारीख और शुभ मुहूर्त
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व का नाम | Makar Sankranti 2026 |
| तिथि | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) |
| सूर्य का प्रवेश | सूर्य का मकर राशि में प्रवेश |
| विशेष योग | पुण्यकाल एवं महापुण्यकाल |
मकर संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त और पुण्य काल
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| संक्रांति क्षण | 14 जनवरी 2026, प्रातः |
| पुण्यकाल | प्रातः 07:00 से सायं 06:00 बजे तक |
| महापुण्यकाल | प्रातः 07:00 से 09:00 बजे तक |
पुण्य काल (शुभ अवधि) के दौरान किए गए दान और स्नान कई गुना ज़्यादा फलदायी माने जाते हैं।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति सीधे सूर्य देव से जुड़ी है। इस दिन सूर्य उत्तरायण (उत्तरी गोलार्ध) में प्रवेश करता है, जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- इस दिन देवता जागते हैं।
- सभी शुभ कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है।
- स्नान, दान और मंत्रों का जाप पापों को नष्ट करता है।
गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार:
- इस दिन भगवान सूर्य (सूर्य देव) अपने पुत्र शनि देव (शनि) से मिलने जाते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं।
- यह दिन पिता-पुत्र के रिश्तों में प्यार और सम्मान का प्रतीक है।
- महाभारत काल में भीष्म पितामह को इसी दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
इसलिए, मकर संक्रांति को त्याग, तपस्या और मुक्ति का त्यौहार भी कहा जाता है।

मकर संक्रांति पूजा विधि
पूजा की पूरी विधि
- ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी) उठकर स्नान करें।
- गंगाजल मिले पानी से स्नान करना शुभ माना जाता है।
- साफ़ पीले या लाल कपड़े पहनें।
- तांबे के बर्तन से सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
- “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- तिल, गुड़, चावल और दान की दूसरी चीज़ें दान करें।
- ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को दान करें।
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व
दान को मकर संक्रांति का सार माना जाता है।
| दान सामग्री | लाभ |
|---|---|
| तिल | पाप नाश |
| गुड़ | मधुरता और सौभाग्य |
| कंबल | शीत दोष निवारण |
| अन्न | अक्षय पुण्य |
| वस्त्र | सुख-समृद्धि |
मकर संक्रांति का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
- उत्तर भारत में खिचड़ी का त्योहार
- गुजरात और राजस्थान में पतंग का त्योहार
- दक्षिण भारत में पोंगल
- महाराष्ट्र में तिलगुल का त्योहार
यह त्योहार एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. Makar Sankranti 2026 कब है?
Ans :- 14 जनवरी 2026, बुधवार।
Q2. मकर संक्रांति पर क्या करना शुभ माना जाता है?
Ans :- स्नान करना, दान करना, सूर्य देव की पूजा करना, और तिल और गुड़ खाना।
Q3. क्या मकर संक्रांति पर शादी करना शुभ है?
Ans :- हाँ, उत्तरायण काल में शादियाँ बहुत शुभ मानी जाती हैं।
Q4. मकर संक्रांति पर कौन सा दान सबसे अच्छा माना जाता है?
Ans :- तिल, गुड़, कंबल और अनाज का दान।
Q5. क्या इस दिन व्रत रखना ज़रूरी है?
Ans :- व्रत रखना आपकी इच्छा पर निर्भर है और इसे अपनी श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Makar Sankranti 2026 सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है, बल्कि जीवन को एक नई दिशा देने का एक मौका है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जैसे सूरज अंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए। स्नान, दान और पूजा से हमें न सिर्फ़ आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव भी बढ़ता है।
अस्वीकरण
यह लेख धार्मिक ग्रंथों, लोक मान्यताओं और सामान्य पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। क्षेत्रीय पंचांगों के अनुसार शुभ समय और तारीखों में भिन्नता हो सकती है। कोई भी धार्मिक कार्य करने से पहले हमेशा स्थानीय पंचांग या विद्वान से सलाह लें।
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